daru

इतनी पीता हूँ कि मदहोश रहता हूँ,
सब कुछ समझता हूँ पर खामोश रहता हूँ,
जो लोग करते हैं मुझे गिराने की कोशिश,
मैं अक्सर उन्ही के साथ रहता हूँ।

daru

कहते है शराब शरीर को ख़तम करती,
शराब सोच समझ को ख़तम करती है,
आओ आज इस शराब को ख़तम करते है,
एक वोतल तुम ख़तम करो एक हम ख़तम करते है

daru

मंजिल उन्हीं को मिलती है,
जिनके हौसलों में जान होती है…
और बंद भट्ठी में भी दारू उन्हीं को मिलती है,
जिनकी भट्ठी में पहचान होती है! 

1 4 5 6