sharabi shayari

 

 पी है शराब हर गली की दुकान से दोस्ती सी हो गयी है  शराब की जाम से गुज़रे है

‘हम’ कुछ ऐसे मुकाम से की आँखें भर आती है मोहब्बत के नाम से

 

sharabi shayari

 

रात गुमसूँ है मगर चेन खामोश नही कैसे कह दू आज फिर होश नही ऐसा

डूबा तेरी आखो की गहराई में हाथ में जाम है मगर पीने का होश नही

 

Sharabi Shayari

मै बैठूंगा जरूर महफ़िल में  पर पीऊंगा नही 
क्योंकि मेरा ग़म मिटा दे इतनी शराब की औकात नही

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