Sharabi Shayari

कभी दिल की कमज़ोरी बन के रह जाती है,
कभी वक़्त की मजबूरी बन के रह जाती है,
ये मोहब्बत वो शराब है ये दोस्त 
जिसे जितना पियो प्यास अधूरी ही रह जाती है..!

Sharabi Shayari

इतनी पीता हूँ कि मदहोश रहता हूँ
सब कुछ समझता हूँ पर खामोश रहता हूँ
जो लोग करते हैं मुझे गिराने की कोशिश
मैं अक्सर उन्ही के साथ रहता हूँ

Sharabi Shayari

मदहोश हम हरदम रहा करते हैं
और इल्ज़ाम शराब को दिया करते हैं
कसूर शराब का नही उनका है यारों
जिनका चेहरा हम हर जाम में तलाश किया करते हैं

Sharabi Shayari

आशिकों को मोहब्बत के अलावा अगर कुछ काम होता
तो मैखने जाके हर रोज़ यूँ बदनाम ना होता
मिल जाती चाहने वाली उससे भी कहीं राह में कोई
अगर कदमों में नशा और हाथ में जाम ना होता

Sharabi Shayari

पी के रात को हम उनको भूलने लगे
शराब में ग़म को मिलने लगे
दारू भी बेवफा निकली यारों
नशे में तो वो और भी याद आने लगे

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