Two line Shayari

कुछसीख ले फूलों से गाफिल ‘मुद्दा-ए-जिन्दगी’,

खुद महकना ही नहीं, ‘गुलशन को महकाना’ भी है….!!
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अपनाचेहरा न बदला गया.

आईने से ख़फ़ा हो गए..☝❤

Two line

*बेचैनियाँ बाजारों में नहीं मिला करती,*
*मेरे दोस्त….!*

*इन्हें बाँटने वाला, कोई बहुत नजदीक का होता हैं..!!!**

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जब तक मन में खोट और दिल में पाप है*

*तब तक बेकार सारे मंत्र और जाप है*
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जिनलोगों को तन्हाई पसंद होती है…
उन्हें समझना बहुत मुश्किल होता है…
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दर्दआसानी से कब ‘पहलू’ बदल के निकला

आँख का तिनका बहुत आँख ‘मसल’ के निकला..
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कहाँवो शोखियां पहले सी,

अब कुछ भी नहीं बाक़ी
चले आए हो तुम क्या

खोजने इन बे-जान आँखों में
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*कुछ खास बात* ,
*नहीं है मुझमें*;
*बस मुझे समझने वाले* ,
*खास होते हैं*।…
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मंज़िलहै, तो रास्ता क्या है ,
हौंसला है तो , फांसला क्या है ,
वो सजा देकर दूर जा बैठे ,
किस्से पूछूँ मेरी खता क्या है ?

Two

मुझे पढ़कर भी तुम जो जवाब नही देते हो ना__

याद करोगे जब हम तेरे लिए लिखना छोड़ देंगे_

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